Tuesday, March 22, 2011

---------कशमकश --------

जिन फूलों को खिलना न था 
कैसा शिकवा उनके मुरझाने पर
जो रिश्ते कभी अपने ही न थे
कैसा शिकवा उनके टूट जाने पर
वक़्त की आंधी ने पर कतरे हों जिस तितली के
कैसी शिकायत उसके न उड़ने पर
जो वस्तु थी हमसे अधिकारातीत 
कैसा गिला उसके खो जाने पर
जिस ख़ुशी पर मेरा नाम लिखा न हो प्रभु ने
कैसा गिला उसके न मिलने पर                                             
                                          ---आनंद सावरण---

3 comments:

Anonymous said...

kya baat hai bhai.........
bahut khoob...bahut khoob.........

ASHUTOSH SINGH said...

kya baat hai bhai.......
bahut khoob//////////

shivendra pratap singh said...

जो नहीं तेरा वो मिला नहीं
जो मिल गया उस पर गिला नहीं
सब क्यूं पाने को आतुर है
बस वही पुष्प जो खिला नहीं .
ढेरो शुभकामनाओ सहित .....