Wednesday, February 2, 2011

----चित्र कैसे बनता है?----


चित्र निरूपण इसलिए ताकि स्वयं सृजन में डूब जाएँ|जीवन एक कला है|कला एक ध्यान है|कोई भी कार्य ध्यान बन सकता है,यदि हम उसमें डूब जाएँ|इसलिए तकनीशियन मात्र न बने रहे|यदि आप केवल एक तकनीशियन तो पेंटिंग अपनी पूर्णता को कभी नहीं पाएगी,वह ध्यान नहीं बन सकती|हमें पेंटिंग में पूरी तरह डूब जाना होगा|पागल की तरह उसमें खो जाना होगा|इतना खो जाना होगा कि हमें यह भी खबर न रहे कि हम कहाँ जा रहे हैं,कि हम क्या कर रहे हैं,कि हम कौन हैं?यह पूरी तरह खो जाने कि स्थिति ही ध्यान होगी|इसे घटने दें|चित्र हम न बनाएं बल्कि उसे बनने दें|मेरा मतलब यह नहीं कि हम आलसी हो जाएँ|फिर तो वह कभी बन ही नहीं पायेगा|हमें पूरी तरह से सक्रिय होना है,फिर भी कर्ता नहीं बना है|यह पूरी कीमिया है,पूरी कला है|
कोरे कागज़ पर सहज रहे कुछ मिनटों के लिए ध्यान में उतर जाएँ|जीवन रुपी कैनवास के सामने शांत हो कर बैठ जाएँ|यह सहज लेखन जैसा होना चाहिए जिसमें हम लेखनी हाँथ में लेकर शांत बैठ जाते हैं और अचानक हाँथ में स्पंदन सा महशूस होता है|हम भलीभांति जानते हैं की हमने कुछ नहीं किया|हम तो सिर्फ शांत-मौन बैठकर प्रतीक्षा कर रहे थे|एक स्पंदन सा हांथों में होता है और वह खुद-ब-खुद गतिमान हो उठता है,और कुछ उतरने लगता है|
यह सृजन आहिस्ता प्रारंभ करें,ताकि आप बीच में न आयें|आपके शोख ज़ज्बात सृजन काल को हिला डुला न दें|आप बाद में मायूश न हों|आप वर्षा काल की तड तड पड़ती हुयी बूंदों की चोट को सहते गुलाब की पंखुड़ियों की तरह सहज रहे|जो भी भीतर से बहे बहने दें,और उसमें लीन हो जाएँ|शेष सब कुछ भूल जाएँ|कला सिर्फ कला के लिए तथा समाज के लिए कुछ अच्छा करने के लिए हो तभी वह ध्यान है|और कोई लक्ष्य नहीं होना चाहिए|
हमें तो अपनी पेंटिंग में,अपने नृत्य में,श्वास में,गीत में,रचना में,अपने जीवन में पूरी तरह खो जाना चाहिए|जो भी हम कर रहे हैं उसमें बिना किसी नियंत्रण के हमें पूरी तरह खो जाना चाहिए|शेष कुछ न बचे,अपने आप जीवन रुपी वीणा सहसा झनझना उठेगी|  
                                                                                                                                 ---आनंद सावरण--- 

1 comment:

shivendra singh said...

शब्द और भाव दोनों ही ओशो से प्रेरित लग रहे हैं
प्रेरणा कही से भी ली जाये पर मौलिकता बनी रहनी चाहिए
इस उच्चतम अभिव्यक्ति के लिए ढेरों शुभकामनाएं